१४

जरी त्रिकाली म्हणसी ‘करुणात्रिपदी’ तरी।

मनोरथ तुझा पूर्ण षण्मासें निश्चया धरी।।१४।।

स्पष्टीकरण / Explanation

१४. ‘करुणात्रिपदी’ का प्रातः, माध्याह्न और सायं पाठ करें।

14.  Recite Karunatripadi thrice a day (morning, midday and evening)